Rajesh Rathod, Author at Gujarat News Post https://gujaratnewspost.com/author/rajesh/ Gujarat News Post | Gujarat News | National News | World News | Hindi News Fri, 05 Dec 2025 12:35:55 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9 https://gujaratnewspost.com/wp-content/uploads/2025/08/cropped-Site-Icon1-32x32.png Rajesh Rathod, Author at Gujarat News Post https://gujaratnewspost.com/author/rajesh/ 32 32 व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा : वैश्विक कूटनीति का नया अध्याय  https://gujaratnewspost.com/vladimir-putins-visit-to-india-a-new-chapter-in-global-diplomacy/ https://gujaratnewspost.com/vladimir-putins-visit-to-india-a-new-chapter-in-global-diplomacy/#respond Fri, 05 Dec 2025 12:33:03 +0000 https://gujaratnewspost.com/?p=2780 रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा न केवल भारत-रूस के ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में एक स्पष्ट संदेश भी। चार साल बाद भारत लौटे पुतिन का यह दौरा, जब यूक्रेन युद्ध की छाया और अमेरिकी दबाव के बीच हो रहा है, दुनिया को भारत की […]

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा न केवल भारत-रूस के ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने का अवसर है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में एक स्पष्ट संदेश भी। चार साल बाद भारत लौटे पुतिन का यह दौरा, जब यूक्रेन युद्ध की छाया और अमेरिकी दबाव के बीच हो रहा है, दुनिया को भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ की याद दिलाता है। पश्चिमी देशों की चिंताओं के बीच यह यात्रा एक ऐसे साझेदार को मजबूत करती है, जो भारत के लिए ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक सुरक्षा का स्तंभ बना हुआ है। लेकिन क्या यह यात्रा वैश्विक संतुलन को नया मोड़ देगी, या सिर्फ पुरानी दोस्ती का पुनरुद्धार साबित होगी?

पुतिन का यह दौरा 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। एस-400 मिसाइल प्रणाली के अतिरिक्त रेजिमेंट, सु-57 लड़ाकू विमानों की खरीद, और ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात पर चर्चा। ऊर्जा क्षेत्र में रूस डिस्काउंटेड तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ाने पर जोर दे रहा है, जबकि व्यापार लक्ष्य 2030 तक 100 अरब डॉलर का है। रूसी विशेषज्ञों के अनुसार, यह यात्रा साबित करती है कि पश्चिम के सभी प्रयास भारत-रूस संबंधों को तोड़ने में नाकाम रहे। भारत ने अक्टूबर में ही 2.5 अरब यूरो मूल्य का रूसी तेल आयात किया, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद जारी है।

दुनिया की नजरें इस यात्रा पर टिकी हैं, और प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं। पश्चिमी मीडिया और राजनयिकों में चिंता का माहौल है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे ‘ट्रंप प्रशासन की निगरानी में पुतिन-मोदी वार्ता’ करार दिया, जहां अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीद को सीमित करने का दबाव डाल रहा है। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के राजदूतों ने संयुक्त संपादकीय में पुतिन को यूक्रेन युद्ध का जिम्मेदार ठहराते हुए भारत से अपील की कि वह ‘युद्ध समाप्त करने वाले नेता’ के रूप में पुतिन पर दबाव डाले। अल जazeera की रिपोर्ट में कहा गया कि यह यात्रा यूक्रेन शांति प्रयासों के बीच हो रही है, जहां रूस द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर तुला है। गार्जियन ने इसे ‘राजनीतिक रूप से खतरनाक समय’ में मोदी-पुतिन की मुलाकात बताया, जहां दोनों देश ट्रंप के अमेरिका और शक्तिशाली चीन से निपटने के लिए एक-दूसरे की जरूरत महसूस कर रहे हैं।

दूसरी ओर, वैश्विक विश्लेषकों में भारत की बहुपक्षीय नीति की सराहना हो रही है। सीएनएन ने सवाल उठाया कि क्या भारत मॉस्को और वाशिंगटन दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रख सकता है? रॉयटर्स के अनुसार, पुतिन भारत को रूसी तेल, मिसाइल और जेट बेचने के लिए जोर दे रहे हैं, जो अमेरिकी दबाव से प्रभावित हुए हैं। मॉडर्न डिप्लोमेसी ने चेतावनी दी कि यह यात्रा पश्चिमी राजधानियों में चिंता बढ़ाएगी, क्योंकि नई दिल्ली मॉस्को की ओर झुकाव दिखा रही है। एक्स पर बहस गर्म है – एक यूजर ने इसे ‘पश्चिमी मेल्टडाउन’ कहा, जहां भारत रूस के साथ एस-500 मिसाइल और रेलॉस सैन्य लॉजिस्टिक्स समझौते पर चर्चा कर सकता है, जो पहली बार किसी गैर-अमेरिकी ब्लॉक देश को भारतीय नौसैनिक और हवाई अड्डों तक पहुंच देगा।

रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है, और ब्रिक्स जैसे मंचों पर सहयोग बढ़ रहा है। पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुणायत ने इसे ‘उत्पादक और महत्वपूर्ण’ बताया, जहां ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर बात होगी। लेकिन चुनौतियां कम नहीं: अमेरिकी सीएएटीएसए प्रतिबंधों का खतरा, यूक्रेन युद्ध पर भारत की तटस्थता, और चीन के साथ रूस के बढ़ते संबंध भारत के लिए चिंता का विषय हैं। वैश्विक नजरिए से देखें तो यह यात्रा बहुपक्षीय दुनिया का आईना है। पुतिन की यात्रा रूस की अलगाव की जंजीर तोड़ती है, जबकि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को मजबूत करता है। पश्चिम इसे ‘चिंताजनक’ कह सकता है, लेकिन वास्तव में यह एक उभरती महाशक्ति का आत्मविश्वास दर्शाता है – जो न तो किसी के ‘जूनियर पार्टनर’ बनेगा, न ही द्विपक्षीय दबाव में झुकेगा। यदि एस-400 और सु-57 जैसे सौदे फाइनल होते हैं, तो यह न केवल भारत की सुरक्षा मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में नया अध्याय लिखेगा। दुनिया को अब यह स्वीकार करना होगा कि भारत का ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ कोई दिखावा नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है।

– राजेश राठौर 
संपदक, गुजरात न्यूज़ पोस्ट

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जिग्नेश मेवाणी का शराबबंदी का मुद्दा : BJP को भारी पड़ सकता है! https://gujaratnewspost.com/jignesh-mevanis-stance-on-the-liquor-ban-issue-could-backfire-on-the-bjp/ https://gujaratnewspost.com/jignesh-mevanis-stance-on-the-liquor-ban-issue-could-backfire-on-the-bjp/#respond Fri, 05 Dec 2025 12:24:34 +0000 https://gujaratnewspost.com/?p=2777 गुजरात राज्य की स्थापना के साथ ही यहां शराबबंदी लागू है। महात्मा गांधी की भूमि होने के कारण इस नीति को राज्य की नैतिक पहचान माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शराब की तस्करी, जहरीली शराब से होने वाली मौतें और बूटलेगर्स की गिरफ्तारियों के समाचार इतने बढ़ गए हैं कि लगता है […]

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गुजरात राज्य की स्थापना के साथ ही यहां शराबबंदी लागू है। महात्मा गांधी की भूमि होने के कारण इस नीति को राज्य की नैतिक पहचान माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शराब की तस्करी, जहरीली शराब से होने वाली मौतें और बूटलेगर्स की गिरफ्तारियों के समाचार इतने बढ़ गए हैं कि लगता है गुजरात में शराबबंदी नहीं, बल्कि “शराब की खुली छूट” चल रही हो ऐसा लग रहा है। कानून कागज पर है, धरती पर उसका कोई अस्तित्व नहीं।

हर रोज़ सरहदों से ट्रक भर-भर कर शराब आती है। दाहोद, वलसाड, सूरत, अहमदाबाद हर जिले में पुलिस की नाक के नीचे गोदाम भरते हैं, बिक्री होती है और लाखों करोड़ों का काला कारोबार चलता है। इतना ही नहीं, जहरीली शराब से हर साल दर्जनों लोग मरते हैं। 2024-25 में भी मेहसाणा, सुरेंद्रनगर, गांधीनगर में ऐसी घटनाएं हुईं। ये सब साबित करता है कि शराबबंदी अब एक असफल नीति बन चुकी है।

इस असफलता के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला ये की भ्रष्टाचार। पुलिस, आबकारी विभाग और स्थानीय राजनेताओं का आशीर्वाद मिले बिना इतना बड़ा धंधा चल ही नहीं सकता। हर महीने “हफ्ता” देकर बूटलेगर बेफिक्र होकर कारोबार करते हैं। छापे पड़ते हैं तो छोटी मछलियां पकड़ी जाती  हैं, बड़े मगरमच्छ बच निकलते हैं। इसी का ताज़ा उदाहरण जिग्नेश मेवानी की हालिया घटना है। 22 नवंबर 2025 को वाव-थराड जिले के धीमा गांव में कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा के दौरान मेवानी ने पुलिस पर शराब और ड्रग्स के धंधे पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया और कहा कि भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के पट्टे (बैज और बेल्ट ) उतार देने चाहिए। इससे नाराज़ होकर 24 नवंबर को बनासकांठा, वाव-थराड, पाटण, मेहसाणा और अरवल्ली जिलों में पुलिस परिवारों ने विरोध प्रदर्शन किए, मेवानी से इस्तीफा और माफी की मांग की। 25 नवंबर को थराड में व्यापारियों ने भी दुकानें बंद कर पुलिस के समर्थन में रैली निकाली। बाद में मेवानी ने वीडियो में कहा, “ईमानदार पुलिस को सलाम, लेकिन ड्रग्स से कमाने वाले अधिकारियों के पट्टे तो उतारने ही चाहिए!” यह घटना दिखाती है कि पुलिस और राजनीति के बीच का उलझा माहौल ही शराबबंदी के अमल को मजाक बना रहा है।

दूसरा ये की सप्लाई और डिमांड का अर्थशास्त्र। जहां तक मांग है, वहां तक सप्लाई आएगी ही। गुजरात की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, युवाओं की आय बढ़ी है, पार्टी कल्चर बढ़ा है। लेकिन कानूनी रूप से शराब नहीं मिलती तो लोग महंगी और खतरनाक शराब खरीदने को तैयार हो जाते हैं। इसलिए बूटलेगर्स का धंधा चमकता है। तीसरा यह की नीति का अधूरा अमल। गुजरात में परमिट सिस्टम है, लेकिन वह बेहद सीमित और जटिल है। दिल्ली या हरियाणा की तरह नियंत्रित, कानूनी बिक्री की व्यवस्था नहीं है। इसलिए लोग काले बाजार की ओर मुड़ते हैं।

एक ओर तो शराबबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग में बड़े सुधार, भ्रष्टाचार-विरोधी कार्रवाई और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल (ड्रोन निगरानी, इंटेलिजेंस नेटवर्क) करना चाहिए। लेकिन दूसरी ओर हकीकत यह है कि पूर्ण शराबबंदी अब अव्यवहारिक हो चुकी है।

दुनिया के कई देशों में  पूर्ण प्रतिबंध से काला कारोबार बढ़ा, सरकारी आय घटी और बुटलेगर और माफिया मज़बूत हुए। गुजरात को भी अब नीति की समीक्षा करनी चाहिए। शराबबंदी जारी रखनी है तो उसे सचमुच लागू करना पड़ेगा, वरना नियंत्रित, कानूनी और पारदर्शी बिक्री की व्यवस्था करनी पड़ेगी – ताकि राज्य को भारी राजस्व मिले और जहरीली शराब से होने वाली मौतें रुकें।

जब तक इनमें से कोई एक ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा, तब तक गुजरात की शराबबंदी एक मज़ाक बनी रहेगी और लोगों की जान से खेल जारी रहेगा। समय आ गया है कि इस नीति को फिर से सोचकर नया स्वरूप दिया जाए  वरना इतिहास हमें माफ नहीं करेगा।

जब तक इनमें से कोई एक ठोस कदम नहीं उठाया जाएगा, तब तक गुजरात की शराबबंदी एक मज़ाक बनी रहेगी?

राजेशराठौर 

संपदक, गुजरातन्यूज़पोस्ट

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