मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और एयरोस्पेस इनोवेशन्स धोलेरा को वैश्विक औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करेंगे – राममोहन नायडू
(PIB) केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजारापु ने धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चल रहे निर्माण और विकास की व्यापक समीक्षा की। मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के अध्यक्ष विपिन कुमार तथा गुजरात सरकार एवं धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंसोर्टियम के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ मंत्री ने परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों का मूल्यांकन किया और इसे पूरा करने के लिए रणनीतिक रोडमैप को अंतिम रूप दिया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल अहमदाबाद या गुजरात के लिए एक क्षेत्रीय संपत्ति नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए अत्यंत रणनीतिक महत्व रखने वाली एक ऐतिहासिक परियोजना है। उन्होंने कहा कि भारत में यह अपनी तरह का पहला एयरपोर्ट प्रोजेक्ट है, जिसे मैन्युफैक्चरिंग हब, भविष्यवादी ग्रीन सिटी और सेमीकंडक्टर क्लस्टर के साथ एकीकृत रूप से विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, “हमारा प्राथमिक उद्देश्य इस परियोजना को यथासंभव शीघ्र पूरा करना और इसके उद्घाटन को तेजी से सुनिश्चित करना है। केंद्र सरकार और गुजरात सरकार, दोनों का अभूतपूर्व स्तर का सहयोग और सक्रिय भागीदारी इस परियोजना को भारत के नागरिक उड्डयन परिदृश्य में वास्तव में एक अनूठा और विशिष्ट प्रोजेक्ट बना रही है।”
स्थल पर भौतिक प्रगति की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद व्यवस्थित योजना और मजबूत क्रियान्वयन के माध्यम से सभी बाधाओं को सफलतापूर्वक दूर किया गया है। उन्होंने बताया कि कुल निर्माण कार्य का लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। विशेष रूप से, अत्याधुनिक टर्मिनल भवन का 75 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है, जबकि सहायक अवसंरचना, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर, मुख्य रनवे और टैक्सीवे का 100 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है।
धोलेरा में विकसित हो रहे विशाल औद्योगिक इकोसिस्टम की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने बताया कि एक समर्पित 2,500 वर्ग मीटर का कार्गो टर्मिनल बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, निर्बाध यात्री आवागमन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिवर्ष 20 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता वाले 25,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले यात्री टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने धोलेरा के पीछे की दूरदर्शी परिकल्पना का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि इसकी प्रारंभिक अवधारणा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थी, जिन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान एक भविष्यवादी शहर, मैन्युफैक्चरिंग हब और विश्वस्तरीय एयरपोर्ट की कल्पना की थी। इस दृष्टि को साकार करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, गुजरात सरकार और NICDIT (DPIIT के अंतर्गत) के बीच एक संयुक्त उद्यम (JV) का गठन किया गया।
राममोहन नायडू किंजारापु ने आगे कहा, “धोलेरा को मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। विश्वस्तरीय एयर कनेक्टिविटी के साथ-साथ एयरपोर्ट को प्रीमियम छह-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जोड़ा गया है। वास्तव में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में रेल कॉरिडोर परियोजना के लिए ₹20,667 करोड़ की मंजूरी दी है और हमने यह सुनिश्चित किया है कि इसका प्रवेश बिंदु और स्टेशन सीधे एयरपोर्ट टर्मिनल के निकट हो। अहमदाबाद से यात्रा करने वाला यात्री हाई-स्पीड ट्रेन से उतरकर सीधे टर्मिनल तक पहुंच सकेगा।”
व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि एयरपोर्ट केवल सामान्य नागरिक उड्डयन संचालन तक सीमित न रहकर आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बनने चाहिए। सोच में यह परिवर्तन धोलेरा की ‘एरोट्रोपोलिस’ के रूप में की गई डिजाइन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, “जब भी वैश्विक या घरेलू कंपनियां भविष्य की तकनीकों में निवेश करना चाहती हैं, चाहे वह सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हो या ग्रीन एनर्जी, उनकी पहली आवश्यकता एयरपोर्ट की निकटता होती है। धोलेरा यही विशिष्ट प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करता है। विशेष रूप से, टाटा की आगामी सेमीकंडक्टर सुविधा और एयरबस की रक्षा साझेदारी को यहां स्थापित हमारे समर्पित मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) हैंगरों से सीधा लाभ मिलेगा। ये हैंगर भारत के पहले स्वदेशी सैन्य परिवहन विमान C-295 के MRO कार्यों को भी समर्थन प्रदान करेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक बड़े मील के पत्थर के रूप में हमने ब्राजील की अग्रणी एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर (Embraer) और अडानी एविएशन सिस्टम्स के बीच एमओयू (MOU) को अंतिम रूप दिया है। भारत के पहले नागरिक ‘मेक इन इंडिया’ विमान की फाइनल असेंबली लाइन के लिए धोलेरा का चयन किया गया है और वर्ष 2028 तक पहले विमान को रोल आउट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे धोलेरा सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस क्षेत्रों में भविष्य के निवेशों के लिए अंतिम गंतव्य के रूप में स्थापित होगा।”
मंत्री ने ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों को सितंबर तक साइट पर सभी कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित करने का निर्देश देते हुए प्रेस ब्रीफिंग का समापन किया। साथ ही, मंत्रालय आगामी तीन महीनों में आवश्यक एयरपोर्ट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए DGCA के साथ निकट समन्वय में कार्य करेगा, ताकि सितंबर या अक्टूबर तक धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को परिचालन में लाया जा सके।
एयर इंडिया की उड़ान से जुड़े अहमदाबाद विमान दुर्घटना के संबंध में मंत्री ने कहा कि वर्तमान में जांच अंतिम चरण में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो), जो इस जांच की जिम्मेदार संस्था है, पूरी क्षमता और पूर्ण पारदर्शिता के साथ जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि रिपोर्ट यथाशीघ्र सार्वजनिक की जाए, लेकिन इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि दुर्घटना कैसे और क्यों हुई, इसका पूरा सत्य सामने आए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जांच की अंतिम रिपोर्ट बहुत जल्द जारी की जाएगी।