गांधीनगर, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की प्रेरक उपस्थिति में रविवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह अहमदाबाद में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की शताब्दी के उपलक्ष्य में सभी को शुभकामनाएं दीं और कहा कि देश में होलिस्टिक व्यू के साथ हेल्थ इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में स्वच्छता मिशन, फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया, योग दिवस का आयोजन, आयुष्मान भारत योजना, आभा और इंद्रधनुष अभियान, जेनेरिक दवाओं को प्रोत्साहन, साथ ही टेलीमेडिसिन और वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मार्गदर्शन जैसे प्रयास किए गए हैं। उन्होनें जोड़ा कि देश में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 1,65,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। देश का स्वास्थ्य बजट वर्ष 2013-14 में 37,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर आज 1,28,000 करोड़ रुपए किया गया है, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में कई सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए हेल्दी डेमोग्राफी आवश्यक है और इसमें चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को बीमारी की बजाय वेलनेस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
कोरोना काल में देशभर के चिकित्सकों द्वारा दी गई सेवाओं की हृदय से सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने आयुष्मान भारत योजना और जेनेरिक दवाओं के प्रति चिकित्सकों द्वारा सकारात्मक वातावरण तैयार करने की अपेक्षा व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ चिकित्सा क्षेत्र के एथिक्स के मानकों को भी पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन जैसी संस्थाओं को मेडिकल एथिक्स को रिडिफाइन करने के प्रयास करने चाहिए। मेडिकल कॉलेजों में भावी डॉक्टरों को एथिक्स की समझ के साथ तैयार कर देश को अच्छे डॉक्टर मिलें, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईएमए द्वारा की जा रही सेवाकीय गतिविधियों की सराहना की और आईएमए से जुड़े चिकित्सकों से टेलीमेडिसिन तथा वीडियो काउंसलिंग जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एसोसिएशन चिकित्सकों की मांगों को प्रस्तुत करने के साथ-साथ देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने में भी योगदान देगा।
अमित शाह ने नव-निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल नायक को ऊर्जावान बताते हुए शुभकामनाएं व्यक्त कीं कि उनके नेतृत्व में एसोसिएशन को नई ऊर्जा और गति मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में अद्यतन सुविधाओं, हेल्थकेयर के लिए लेटेस्ट टेक्नॉलोजी तथा अनेक मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुदृढ़ हुई हैं। देश में एम्स, मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा पर विशेष जोर दिया है। जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे, तब राज्य में केवल 1,175 मेडिकल सीटें थीं, जबकि आज जिलेवार मेडिकल कॉलेजों की योजना से हर वर्ष 7000 से अधिक डॉक्टर तैयार हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में आमूल परिवर्तन हुए हैं। वर्ष 2014 से पहले देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, जिनमें 88 प्रतिशत वृद्धि के साथ आज यह संख्या 731 हो गई है। इसके अतिरिक्त उन्होनें जोड़ा कि एमबीबीएस सीटों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2014 में मेडिकल 51 हजार थी, जो आज बढ़कर एक लाख बारह हजार से पार हो गई हैं। पीजी सीटों में 133 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 31 हजार से अभी 72 हजार हो गई हैं।
प्रधानमंत्री के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने हेतु गुजरात द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात सरकार ने ‘विकसित गुजरात @2047’ का रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस रोडमैप अंतर्गत वर्ष 2024 तक 100 प्रतिशत यूनिवर्सल हेल्थकेयर कवरेज, एनीमिया और कुपोषण के उन्मूलन जैसे लक्ष्यों के साथ एक स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया है। स्वस्थ और विकसित गुजरात के माध्यम से सशक्त एवं समृद्ध विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मेडिकल क्षेत्र भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस वर्ष देशभर में सरदार पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती तथा ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के साथ-साथ ऑल इंडिया मेडिकल कॉन्फ्रेंस और एसोसिएशन की शताब्दी भी मनाई जा रही है। ऐसे में यह उत्सव आप सभी के लिए डबल बोनांजा जैसा है। उन्होंने कहा कि एक शताब्दी से भी अधिक समय से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देश के स्वास्थ्य क्षेत्र का मार्गदर्शन कर रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन केवल एक व्यावसायिक संगठन ही नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वास्थ्य संरक्षण का एक सशक्त मंच बन चुका है।
आईएमए नैटकॉन-2025 की थीम पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन की थीम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ‘हेल्थकेयर एंड वेलबीइंग फॉर ऑल’ के विचार के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि ‘सर्विस, साइंस और सिनर्जी’ की शताब्दी के ध्येय मंत्र के साथ आप सभी एकत्र हुए हैं, यह अभिनंदनीय है। सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श देश के स्वास्थ्य उपचार क्षेत्र को नई दिशा प्रदान करेंगे।
मुख्यमंत्री ने आईएमए के नए अध्यक्ष डॉ. अनिल नायक और उनकी टीम को शुभकामनाएं दीं तथा आशा व्यक्त की कि नई टीम ‘नेशन फर्स्ट, पेशेंट फर्स्ट’ के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ेगी।
इस अवसर पर आईएमए के चीफ पैट्रन और पूर्व अध्यक्ष केतन देसाई ने संस्था की शताब्दी के उपलक्ष्य में सभी को शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह संस्था सम्पूर्णतः लोकतांत्रिक तरीके से और सभी के सहयोग से संचालित होती है। डॉ. देसाई ने देशभर में हेल्थ केयर सेक्टर में हो रहे व्यापक और मूलभूत परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने नव-निर्वाचित डॉ. अनिल नायक के संघर्ष की सराहना करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
डॉ. अनिल जे. नायक ने आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में शपथ ग्रहण की और अपने पहले अध्यक्षीय संबोधन में सभी का आभार व्यक्त करते हुए सरकार के समक्ष अपेक्षाएं रखीं।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों के करकमलों द्वारा ‘100 स्टेप्स फॉर हेल्दी लाइफ’ का विमोचन किया गया। साथ ही वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र भी प्रदान किया गया।
इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भानुशाली, सेक्रेटरी जनरल सर्वरी दत्ता, डॉ. पीयूष जैन, डॉ. अनिल पटेल, डॉ. मेहुल शाह सहित एसोसिएशन के वरिष्ठ पैट्रन्स, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।
I am trying to understand my undertone before ordering makeup samples, but my phone camera keeps changing the result. In a north-facing window my skin looks fairly neutral, yet the same photo taken later can look noticeably warmer. I turned off beauty mode and I am using the rear camera, although automatic white balance still seems to interfere. A plain grey top helps a little, but I cannot tell whether I am comparing colour or simply reacting to contrast. I keep the camera angle level to reduce differences that have nothing to do with my skin. I would prefer a short routine so I can repeat it on another day instead of chasing a perfect single image. I plan to compare photos without editing rather than relying on a memory of how the first attempt looked. I found a skin undertone test camera reference while looking for a sensible process and plan to record the time, light, and the colours placed near my face. If you use a phone for this which conditions should stay fixed before I compare the photos?